कल तक लालबत्ती की गाड़ी में घूमती थी ये राजमंत्री और अब चरा रही है बकरियां,आखिर क्या है वजह


Source PBH | 30 Aug 2019

कल तक लालबत्ती की गाड़ी में घूमती थी ये राजमंत्री और अब चरा रही है बकरियां,आखिर क्या है वजह

आप सभी ने  कहावत तो सुनी ही होगी कि वक्त बहुत बलवान होता है वो कब रंक को कब राजा और राजा को रंक बना दे किसी को नहीं पता। ऐसा ही एक वाकया मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की एक आदिवासी महिला की कहानी है। जो कभी बड़ी शान से लाल बत्ती की गाड़ियों में घूमा करती थी। इतना ही नहीं उसे राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था। और गरीबी के चलते अब उसके पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी तक मश्कत से जुटानी पड़ती है। साथ ही बकरियां भी पालती है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पास अब रहने को घर तक नहीं है, जिसकी वजह से वह एक कच्ची टपरी में रहकर अपने बच्चों का भरण-पोषण कर रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष रही जूली कभी लाल बत्ती कार में घूमती थीं और शासन की ओर से उन्हें राज्य मंत्री का भी दर्जा भी प्राप्त था। बड़े-बड़े अधिकारी कर्मचारी मैम कहकर संबोधित करते थे, लेकिन आज जूली गुमनामी के अंधेरे में जिले की बदरवास जनपद पंचायत के ग्राम रामपुरी की लुहारपुरा बस्ती में रहकर बकरी चराने का काम कर रही हैं। वहीं वर्ष 2005 में पूर्व विधायक और जिले के कद्दावर नेता रामसिंह यादव ने जूली को जिला पंचायत सदस्य बनाया और फिर क्षेत्र के एक अन्य पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने जूली को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया। जूली इन दिनों गांव की 50 से अधिक बकरियों को चराने का काम कर रही हैं और उनके अनुसार उन्हें प्रति बकरी 50 रुपए प्रतिमाह की आय होती है।
मीडिया ने जब इस बारें में जूली से पूछा तो उन्होंने बताया कि मजदूरी के लिए गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में भी जाना पड़ता है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली जूली का कहना है कि उन्होंने रहने के लिए इंदिरा आवास कुटीर की मांग की थी, जो उसे स्वीकृत तो हुई लेकिन मिली नहीं, इस कारण वह एक कच्ची टपरिया में रहने को मजबूर हैं।



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